#acharyaprashant
वीडियो जानकारी: 17.11.23, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नॉएडा
प्रसंग:
चीज़ का होना एक बात है, चीज़ का अर्थवान होना बिलकुल दूसरी बात है
रिश्ता ऐसे से बनाएँगे जो हमारे ग़लत रिश्तों से हमें दूर कर रहा हो
स्वार्थ के लिए एक ही चीज़ भली है - जिसमें मेरा लाभ हो। रिश्ता सार्थक तभी है जब स्वार्थ न हो।
जो मजबूती कोमलता के साथ न आए उसको मज़बूती नहीं, मृत कठोरता कहते हैं।
संगीत: मिलिंद दाते
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